Saharanpur Buldoger Action: शुक्रवार रात सहारनपुर शहर में एक खबर तेजी से फैलने लगी कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद पर प्रशासन बड़ी कार्रवाई करने वाला है। सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हुआ तो देर रात कलेक्ट्रेट के आसपास अचानक भारी पुलिस बल की तैनाती ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। पांचों गेट बंद कर दिए गए और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटों बाद परिसर में बुलडोजर पहुंचने वाला है। तड़के शुरू हुआ ध्वस्तीकरण शनिवार तड़के करीब चार बजे प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई। कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर बुलडोजर पहुंचाए गए और मस्जिद के एक हिस्से को गिरा दिया गया। पूरी इमारत को हटाने के लिए मौके पर छह बुलडोजर लगाए जाने की जानकारी सामने आई। कार्रवाई के दौरान बाहरी लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई और परिसर के अंदर तथा बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स को भी लगाया गया। रात में नेताओं की बढ़ी सक्रियता मस्जिद को लेकर कार्रवाई की आशंका की खबर फैलते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा। उनके दामाद शायान मसूद ने भी सोशल मीडिया लाइव के जरिए घटनाक्रम की जानकारी साझा की। वहीं, सपा विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज खान सहित कई नेताओं के कलेक्ट्रेट पहुंचने की कोशिश की जानकारी सामने आई। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के चलते नेताओं को गेट पर ही रोक दिया गया। DM से मुलाकात के बाद भी बदल गया पूरा घटनाक्रम देर रात सपा नेताओं ने जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात की। नेताओं ने मस्जिद पर कार्रवाई की आशंका जताई। बताया गया कि उस समय मस्जिद को सील करने और तत्काल ध्वस्तीकरण नहीं किए जाने की बात कही गई थी। इसके बाद लगा कि रात में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा। लेकिन कुछ ही घंटों बाद सुबह करीब चार बजे बुलडोजर पहुंच गए और कार्रवाई शुरू हो गई। डेढ़ साल से अदालत में चल रहा था विवाद कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत 24 मार्च 2025 को हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत पर सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने विवादित जमीन को सरकारी संपत्ति मानते हुए मस्जिद को अनधिकृत निर्माण माना और परिसर खाली करने तथा ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। आदेश में 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई। वक्फ दावे पर कोर्ट का फैसला मस्जिद पक्ष ने इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए करीब 150 साल पुराना धार्मिक स्थल होने का दावा किया। हालांकि, अदालत के समक्ष इस दावे के पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात आदेश में सामने आई। मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील की, लेकिन 2 सितंबर 2026 को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने अपील खारिज कर दी और पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके महज दो दिन बाद तड़के हुई प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया। अब इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कदमों का दौर आगे बढ़ने की संभावना है। ये भी पढ़ें: POCSO की FIR होते ही फरार हुआ स्वतंत्र भारद्वाज, बुलंदशहर में ऐसे चकमा देते पकड़ा गया